God every where present: राहु – केतु: v परिचय – यह धुआँ जैसा , नीले रंग का , वनचर , भयंकर , प्रकृती का तथा बुद्धिमान होता है । - पराशर v इस ग्रह का शरीर आधा , ...
Author: पं. ऋतुराज दुबे
Related Posts
Some simillar article from this label, you might also like
भगवान शनि देव का बायोडाटा अँग्रेजी परिचय - सैर्टन (Saturn) संस्कृत परिचय &
राहु – केतु v परिचय – यह धुआँ जैसा ,नीले रंग का , वनचर , भयंकर , प्रकृती का तथा बुद्धिमान होता है ।
बारह भावो में शनि का फल - प्रथम भाव प्रथम भाव में अगर शनि हो तो वह अपनी महादशा में हानि फल देता हैं , लेकिन तुला व मकर लग्न का हो
सप्तम भाव में शनि का प्रभाव और उपाय With English 1. सातवें भाव में शनि होतो आदमी कोई भी कार्य श
कुंडली मैं 2nd घर में शनि का प्रभाव और उपाय 1. जिस जातक की कुंडली में 2nd घर में शनि हो , वह लकड़ी संबंधी व्यापार ,
दशम भाव में शनि का प्रभाव और उपाय 1. दशवें भाव में शनि हो तो वह आदमी न्यायप्रिय , अधि
Previous Post
मैंपन का भाव
मैंपन का भाव
Next Post
राहु – केतु
राहु – केतु
- Blog Comments
- Facebook Comments
Subscribe to:
Post Comments (Atom)